शिखर दर्शनम् पाप नाशम्
शिखर दर्शनम् पाप नाशम् धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि मनुष्य और समय के बीच की जीवित चेतना है। इसी चेतना का प्रतीक है धर्म ध्वजा—जो मात्र झंडा नहीं, बल्कि सनातन मूल्यों का स्मरण है। केसरिया ध्वजा त्याग, तप, तेज और आध्यात्मिक ऊर्जा की घोषणा है। यह दिशा, संरक्षण और दिव्यता का संकेत देती है। इतिहास में राजपूतों, संतों और गुरुओं की पताकाएँ भी इसी रंग में रहीं, इसलिए यह वीरता, धर्म-रक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक बन गई। धर्म ध्वजा सरल दिखाई देती है, पर उसका अर्थ अत्यंत गहरा है—ऊँचाई प्रेरणा देती है, रंग आदर्शों का प्रतीक है और लहराहट धर्म की सतत जागृति का संकेत। पवनदेव से लेकर कृष्ण और प्राचीन राजाओं तक, ध्वजा हमेशा यही संदेश देती रही है कि धर्म-रक्षा ही शक्ति का मूल है। अयोध्या के शिखर पर उठती रामध्वजा केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता की दीर्घ, धीर और सांस्कृतिक यात्रा का प्रतीक है—यह याद दिलाती है कि समय बदलता है, पर आदर्श अमर रहते हैं। ध्वजा की हर लहराहट भीतर छिपे धर्मबोध को जगाती है और श्रीराम के उस समावेशी धर्म की याद दिलाती है जो विभाजन नहीं, संपूर्ण मानवता को जोड़ने क...