मुख्यमंत्री जी, सागर को सिर्फ एक केस फाइल मत बनाइए, अफसरो पर गाज गिराने से पहले आबकारी नीति का "पोस्टमार्टम" कीजिए
मुख्यमंत्री जी, सागर को सिर्फ एक केस फाइल मत बनाइए, अफसरो पर गाज गिराने से पहले आबकारी नीति का "पोस्टमार्टम" कीजिए मौत का कारण अभी जांच में, लेकिन आबकारी व्यवस्था से सवाल साफ—क्या महंगी वैध शराब अवैध बाजार को ताकत दे रही है? भुवन तोषनीवाल( निमाड़ प्रहरी ) सागर के बंडा से सामने आई संदिग्ध मौतों की घटना ने मध्यप्रदेश को झकझोर दिया है। मौतें जहरीली शराब से हुईं या फूड पॉइजनिंग अथवा किसी अन्य विषाक्तता से—इसका अंतिम फैसला जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट ही करेगी। CMHO ने भी फिलहाल इसे संदेह का मामला बताया है। ऐसे में वैज्ञानिक पुष्टि से पहले मौतों को जहरीली शराब से जोड़ना जल्दबाजी होगी। लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है— क्या मध्यप्रदेश की आबकारी व्यवस्था को सरकार ने इतना पंगु बना रखा है, वह बाजार की सस्ती महंगी शराब की प्रतिस्पर्धा को कंट्रोल नहीं कर पा रही। हर बार कहानी लगभग एक जैसी होती है। तमाम जिलों से घटना सामने आती है। इस अपराध के पीछे नीतिगत व्यवस्था भी जिम्मेदार! अवैध शराब का कारोबार केवल अपराधियों के दम पर नहीं चलता। इसके पीछे मांग, कीमत, मुनाफा, आपूर्ति और ...