बिना स्तन कोई स्त्री की कल्पना व्यर्थ है..!! ईश्वर ने स्तन क्यों दिए समझिए..
" बिना स्तन कोई स्त्री की कल्पना व्यर्थ है..!! ईश्वर ने स्तन क्यों दिए समझिए.. निमाड़ प्रहरी स्त्री के स्तनों से जुड़ा होता है स्त्री का सारा व्यक्तित्व । जब तक स्त्री माँ नही बन जाती तब तक उसकी ऊर्जा पूर्णतः स्तनों तक नही पहुँचती..!! शरीर विशेषज्ञ कहते हैं कि पुरूष के शरीर में स्तन क्यों होते है। जब कि उनकी कोई आवश्यकता नहीं दिखाई देती है। क्योंकि पुरूष को बच्चे को दूध तो पिलाना नहीं है। फिर उनकी क्या आवश्यकता है। वे ऋणात्मक ध्रुव है। इसलिए तो पुरूष के मन में स्त्री के स्तनों की और इतना आकर्षण है। वे धनात्मक ध्रुव है। ध्यान दें स्तनों का आकार बड़ा छोटा होना शरीर में बनने वाले हार्मोन के संतुलन पर निर्भर करता है, विषम आकर में खान पान या मानसिक व्यवहार को सही कर इसे उचित आकर दिया जा सकता है. इतने काव्य, साहित्य, चित्र,मूर्तियां सब कुछ स्त्री के स्तनों से जुड़े है। ऐसा लगता है जैस पुरूष को स्त्री के पूरे शरीर की अपेक्षा उसके स्तनों में अधिक रस है। और यह कोई नई बात नहीं है। गुफाओं में मिले प्राचीनतम चित्र भी स्तनों के ही है। स्तन उनमें महत्वपूर्ण है। बाकी का सारा शरीर ऐसा मा...