एक समय था जब MBBS के बाद सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ या स्त्री रोग विशेषज्ञ बनना बहुत से विद्यार्थियों का सपना हुआ करता था।
एक समय था जब MBBS के बाद सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ या स्त्री रोग विशेषज्ञ बनना बहुत से विद्यार्थियों का सपना हुआ करता था। आज NEET PG की काउंसलिंग से जुड़ा एक आंकड़ा देखकर मन में कई सवाल उठे। टॉप 100 रैंकर्स में से उपलब्ध 96 सीट आवंटनों में केवल 3 विद्यार्थियों ने जनरल सर्जरी, 3 ने पीडियाट्रिक्स और महज 1 विद्यार्थी ने गायनेकोलॉजी जैसी ब्रांच को चुना। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या आज के मेडिकल विद्यार्थियों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं या इसके पीछे हमारे समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था की भी कोई भूमिका है? एक समय था जब MBBS के बाद सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ या स्त्री रोग विशेषज्ञ बनना बहुत से विद्यार्थियों का सपना हुआ करता था। लेकिन आज इन ब्रांचों में काम करने की परिस्थितियां आसान नहीं हैं। लंबे समय तक ड्यूटी, रात की इमरजेंसी, गंभीर मरीजों की जिम्मेदारी और हर समय किसी अनहोनी की आशंका के बीच काम करना पड़ता है। सबसे ज्यादा चिंता तब होती है जब डॉक्टर अपनी पूरी कोशिश करने के बावजूद मरीज को बचा नहीं पाता और उसे मरीज के परिजनों के गुस्से, गाली-गलौज, मारपीट और अस्पताल में तोड़फोड़ का सामना करना पड़...