श्रीराम कथा में भोलेनाथ के मूलस्थान कैलाश मानसरोवर मुक्ति हेतु संकल्प
श्रीराम कथा में भोलेनाथ के मूलस्थान कैलाश मानसरोवर मुक्ति हेतु संकल्प निमाड़ प्रहरी 9977766399 बुरहानपुर। लालबाग स्थित श्रीराम मंदिर, चिंचाला में चल रही श्रीराम कथा के दौरान कथा वाचक प.पू. साध्वी ममता व्यास जी ने भगवान श्रीराम के नामकरण संस्कार का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम ने माता कौशल्या की कोख से जन्म लिया, वहीं माता कैकेयी से भरत तथा माता सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। चारों भाई बाल्यकाल से ही एक-दूसरे के साथ छाया की तरह रहते थे। नामकरण संस्कार की महत्ता बताते हुए प.पू.ममता दीदी ने कहा कि सनातन वैदिक परंपरा में नामकरण संस्कार अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। प्राचीन परंपरा में बालक का नाम उसकी प्रकृति, ग्रह-नक्षत्र एवं गणितीय गणना सहित विभिन्न आधारों पर रखा जाता था, जिससे उसके जीवन को दिशा और संस्कार प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हम अपनी सुविधानुसार नाम रखने लगे हैं और इसी कारण नाम और कर्म में विरोधाभास दिखाई देता है। हमें सनातन संस्कृति के 16 संस्कारों को समझकर उन्हें जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। श्रीराम कथा के दौरान श्रद्धाल...