अपने सत्संग में स्वामी संत शरण महाराज जी ने मानव जीवन के ऊपर चर्चा करते हुए

 अपने सत्संग में स्वामी संत शरण महाराज जी ने मानव जीवन के ऊपर चर्चा करते हुए 

बताया कि मानव कल्याण का सबसे सुगम और सरल तरीका भगवान श्री हरि की भक्ति है भक्ति और भजन दोनों में थोड़ा-थोड़ा अंतर है भक्ति स्वतंत्रता की जाती है भक्ति में कोई बंधन नहीं होता है लेकिन भजन में विधि होती है और विधि से की जाने वाली भजन ईश्वर का सानिध्य करती है 

निमाड़ प्रहरी 9977766399 

मानव जीवन का उद्देश्य है भगवान ने व्यक्ति को जीवन दिया है और मनुष्य बनाया है मनुष्य का मूलभूत कर्तव्य है कि भगवान के कार्यों में सहयोग करें और भगवान का कार्य क्या है जीव पर दया करना जीवों का कल्याण करना निस्वार्थ भाव से किया गया सेवा सहयोग और सहानुभूति बुनियादी जरूरत को पूरा करवाया जाए जरूरतमंदों की मदद की जाए यही ईश्वर की सच्ची सेवा है 

और जीव कल्याण के लिए जीवो पार्जन के लिए शिक्षा आवश्यक है संस्कार और शिक्षा से भी मनुष्य का कल्याण होता है और वह कल्याण ऐसा होता है कि जीवन में अपने मूलभूत सुविधाओं के लिए शिक्षा और संस्कार व्यक्ति को जीवन जीने में सहयोग करता है 

स्वच्छ वातावरण के लिए भजन पानी रहन-सहन वातावरण यह भी मानव को अनुकूलता प्रदान करता है क्योंकि परिस्थिति अनुकूल और प्रतिकूल होती है प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मनुष्य अपने विवेक और बुद्धि के माध्यम से स्थितियों को अनुकूल बना लेता है और अनुकूल परिस्थिति में ईश्वर प्राप्ति सुगमता और सहजता से होती है रामचरितमानस में 

गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं 

जो साभित आवा सर नाई। राखो ताहि प्राण की नई।

ईश्वर कहते हैं अर्थात ब्रह्म कहता है परमात्मा कहता है कि जीव हमारी शरण में आ जाए श्रद्धा विश्वास प्रेम लेकर के तुम्हें उसको अपने प्राणों की तरह मानता हूं और उसके जीवन का समस्त दायित्व और कर्तव्य और उसकी आवश्यकताओं की चिंता में स्वयं करता हूं उसको निश्चित कर देता हूं कि वह किसी भी प्रकार की कोई चिंता ना करें वह केवल मेरा चिंतन करें मुझे बजे मेरे को जाने और मेरा बना करके जीवन जीए और उसके समस्त आने वाले कार्यों पर मैं स्वयं नजर रखेगा और उसके कल्याण के लिए मैं स्वयं सोचूंगा क्योंकि मेरे हृदय में और मेरा स्वभाव ही है कि सत्य प्रेम करुणा दया यह मेरा गुण है जैसे पेड़ का गुण है व्यक्ति को छाया देना पानी जल का स्वभाव है शीतलता प्रदान करना वायु का कर्तव्य है की ठंडक प्रदान करना हवा देना ऐसे ही अग्नि का प्रभाव है कि वह पाप और उष्णता प्रदान करें इसी प्रकार से हे मानव है जीव है भक्तों है संत है मनी है ऋषि मेरा स्वभाव पहले जानू मेरे स्वभाव को जानने के बाद जब मुझे मनोज तो मैं आपका परम कल्याण करूंगा यह मेरा प्राण है यह मेराकर्तव्य है 

स्वामी संत शरण महाराज जी ने अपने प्रभु प्रेम और राम जी के दयालुता और स्वभाव के बारे में वर्णन करते हुए कहते हैं कि राम सरिस को उ नही

असोको उदार जग माही 

भगवान राम से बड़ा कोई दयालुता और भगवान राम से बड़ा कोई कृपाल करने वाला और भगवान राम से महान कोई जीव से प्रेम करने वाला नहीं है इसलिए ही मानव है जीव तुम उसे परम तत्व परमात्मा श्री राम का नाम का स्मरण करो उनकी शरण लो और वही कृष्णा है वही शिव है वही राम है ऐसे मां की भ्रांति को दूर करके पूर्ण ब्रह्म परमात्मा श्री राम का भजन करो चिंतन करो स्मरण करो और उन्हीं से प्रार्थना करो तुम्हारा जीवन कल्याण हो जाएगा कल्याण नाम भगवान शिव का है शिव ही कल्याणकारी हैं और शिव स्वयं भगवान राम को दिन-रात स्मरण करते हैं और उन्हीं के स्मरण करने से शिव जगत पूजा हो गए उन्हें का स्मरण करने से हलाहल विष का पान करके भी नीलकंठ बन गए भगवान शिव के ऊपर भी भगवान राम की आहत की कृपा है इसलिए करुणा निधान भगवान श्री राम का भजन करने से निश्चित तौर पर जीव का कल्याण होता है जय श्री कृष्णा जय श्री राम राधे राधे जय हनुमान जय श्री सीताराम

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