पहला दरवाजा.....पहले वेश्या से भोग विलास करो...फिर चले जाना...

 "पहला दरवाजा.....पहले वेश्या से भोग विलास करो...फिर चले जाना...

निमाड़ प्रहरी समाचार पत्र 

वहाँ एक वेश्या खड़ी थी।

शर्त लिखी थी— “वेश्या से संबंध बनाने पर ही दरवाजा खुलेगा।” सज्जन व्यक्ति ने इसे पाप समझा और आगे बढ़ गया....


दूसरा दरवाजा:


वहाँ एक गाय बंधी थी।

लिखा था— “गाय को लात मारने पर ही दरवाजा खुलेगा।”

गाय को लात मारना अधर्म था, इसलिए वह यहाँ से भी लौट गया....


तीसरा दरवाजा:


वहाँ मांस रखा था।

शर्त थी— “मांस खाने के बाद ही प्रवेश मिलेगा।”

उसने मांस को घृणा से देखा और चौथे दरवाजे की ओर बढ़ गया....


चौथा दरवाजा:


वहाँ शराब की एक बोतल रखी थी।

लिखा था— “पूरी बोतल पीने पर ही दरवाजा खुलेगा।”

महल में जाना उसके लिए बहुत ज़रूरी था। उसने सोचा—

“पिछली शर्तों की तुलना में यह कम अधर्म है।”

उसने पूरी शराब पी ली....



शराब पीते ही उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई।

नमकीन खाने की तलब हुई— उसने मांस खा लिया।

कामवासना जागी— उसने वेश्या से संबंध बना लिए।

गुस्से में आकर उसने गाय को भी लात मार दी।

और अंत में— वह महल के अंदर चला गया।


मोरल (नीति शिक्षा):


शराब ने उससे वे तीनों अपराध करवा दिए,

जो वह जीवन भर कभी नहीं करना चाहता था।

इसलिए शराब को हल्के में मत लीजिए।

यह रिश्ते, धन-दौलत, परिवार, स्वास्थ्य

और वर्षों में कमाया हुआ पुण्य—

सब कुछ नष्ट कर देती है 

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