युवाओं की समाज संगठन के कार्यक्रमों में अरुचि - कारण और निवारण...
महेश नवमी की शुभकामनाओं के साथ. ....
युवाओं की समाज संगठन के कार्यक्रमों में अरुचि - कारण और निवारण...
प्रधान संपादक निमाड प्रहरी समाचार-पत्र
समाज संगठन का ताना-बाना समाज के सभी वर्गों,वयों और विचारधाराओं का समायोजित संस्करण होता है, समाज की अवधारणा उसमें स्थित सारे परिवारों को एक जाजम पर एकत्रित कर सबके उन्नयन का सामुहिक प्रयास होता है और यह उन्नयन सभी वय (उम्र) के व्यक्तियों यथा; वरिष्ठ, कनिष्ठ, युवाओं,तरुणों का विकास होता रहे और इस कार्य को मूर्त रूप प्रदान करने का कार्य समाज संगठन के चयनित विविध सेवाभावी पदाधिकारियों द्वारा स्थानीय समितियों,महिला मण्डलों और युवा संगठनों के माध्यम से दशकों से सतत् हो रहा है।
समाज संगठन के सामने आज के दौर में एक महती चुनौती प्रकट हुई है,- विगत् कुछ सालों से सामाजिक कार्यक्रमों में युवाओं (युवकों एवं युवतियों) की उपस्थिति नगण्य होती जा रही है, युवावर्ग समाज की मुख्यधारा से कट रहा है।
समाज संगठन की सामाजिक गतिविधियों में युवाओं का जुड़ाव बहुत आवश्यक है क्योंकि समाज के कर्णधार ही भविष्य के सूत्रधार बनेंगे और जब यही युवा अपने सामाजिक दायित्वों का अभी से निर्वहन नहीं करेंगे तो समाज का सांगठनिक भविष्य उज्जवल नहीं बन पाएगा,अब प्रश्न यह है कि आखिर विगत ५, ६ वर्षों में युवाओं की समाज के सांगठनिक कार्यक्रमों में रुचि एवं उपस्थिति कम क्यों हो रही है ??? यह यक्ष प्रश्न सभी को खल रहा है लेकिन समाज का कोई भी सूत्रधार यह नहीं बता पा रहा है कि इस समस्या के मूल में क्या क्या कारण है,,, मुझे जहां तक कारण ज्ञात है वह यह हो सकतें हैं जैसे...
१ युवाओं की सोच में समाज के प्रति समर्पण भावना की कमी।
२ समाज के पदाधिकारियों द्वारा युवा वर्ग के लिए कार्यक्रमों का अभाव एवं संगठन में सक्रिय युवा संगठन के चुनाव में ही अधिक रुचि रखते हैं और चुनाव पश्चात् सतत् रचनात्मक कार्यक्रम नहीं कर पाते हैं।
३ उच्च और उच्चतम शिक्षा पश्चात् अधिकांश युवाओं (युवक एवं युवतियां) का समाज से मोहभंग हो जाना एवं कुछ युवाओं द्वारा समाज से बाहर विवाह करना तत्पश्चात् समाज की मुख्यधारा में शामिल नहीं हो पाना।
४ परिवार के मुखिया/वरिष्ठों द्वारा युवावर्ग को कार्यक्रमों में उपस्थित रहने हेतु संकल्पित प्रयासों में कमी।
५ समाज संगठनों द्वारा संचालित कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी कम एवं युवा संगठनों द्वारा युवाओं हेतु प्रेरणास्पद कार्यों का नगण्य होना।
६ युवा संगठनों द्वारा समाज के समस्त युवाओं तक पहुंच का अभाव।
७ युवाओं द्वारा अपने व्यवसायिक/नौकरी/प्रोफेशन कार्यो के साथ सामाजिक गतिविधियों में संतुलन का अभाव।
८ समाज संगठन द्वारा युवाओं हेतु परिचय सम्मेलन का आयोजन नहीं किया जाना अंतर्जातीय विवाहों के कारणों में से एक मूल कारण है।
उपरोक्त कारणों से समाज संगठन के कार्यक्रमों में युवाओं की बहुत ही कम उपस्थिति देखी जा सकती है और यह बेहद चिंताजनक बात है अब समाज के सूत्रधारो को उपस्थिति बढ़ाने हेतु सकारात्मक प्रयास करने होंगे...
निवारणार्थ सुझाव -
१ युवाओं को समाज के प्रति समर्पित भाव रखना चाहिए अर्थात समाज संगठन द्वारा वर्ष में केवल दो या तीन कार्यक्रम रखे जाते हैं और उक्त कार्यक्रमों के लिए एक दिवसीय अवकाश लिया जा सकता है खासकर महेश नवमी पर सभी युवाओं को अवश्य उपस्थित रहना चाहिए।
२ समाज संगठन के पदाधिकारियों द्वारा युवावर्ग (युवक और युवतियों) हेतु भी रचनात्मक, शिक्षात्मक कार्यक्रम समावेश करना चाहिए।
३ समाज के युवा संगठन द्वारा सांगठनिक चुनाव पश्चात् सम्पूर्ण समाज के युवाओं से सोशल मीडिया के माध्यम द्वारा सम्पर्क स्थापित करना चाहिए।
४ समाज के उच्च शिक्षित युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम द्वारा समाज से सतत् जुड़े रहना चाहिए और महेश नवमी के स्थानीय कार्यक्रम में अपनी व्यक्तिगत उपस्थिति दर्ज कराना चाहिए।
५ परिवार के मुखियाओं द्वारा परिवार के युवाओं को समाज संगठन द्वारा आहूत कार्यक्रमों में उपस्थित होने/रहने हेतु प्रेरित करना चाहिए।
६ नौकरीपेशा युवाओं द्वारा समाज के युवा संगठनों को अपने रचनात्मक सुझाव/सहयोग सोशल मीडिया के माध्यम से एवं आहूत कार्यक्रम में जीवंत उपस्थित रहकर अवश्य प्रदान करने की कोशिश करना चाहिए।
७ समाज संगठन संकल्पित प्रयासों के माध्यम से युवाओं को सामाजिक गतिविधियों से जोड़कर रखें क्योंकि युवावर्ग का समाज की मुख्यधारा में शामिल रहना संगठन के सुदृढ़ भविष्य हेतु आवश्यक है।
अपनी लेखनी को यह प्रतिपादित कर विराम देना चाहता हूं कि आज के दौर में समाज संगठन के कार्यक्रमों में युवक युवतियों की कम उपस्थिति महज हमारे समाज में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण वैश्य समाज में देखी जा रही है अतः हमारे समाज का केन्द्रीय संगठन, स्थानीय समितियां और महिला मण्डल एवं युवा संगठन उपस्थिति बढ़ाने हेतु अवश्य मंथन करें,,, समाज संगठनों द्वारा केलेंडर वर्ष में दो चार कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और युवा समय निकालकर आ ही सकते हैं तो फिर अनुपस्थिति क्यों ??? अतः समाज का युवा वर्ग अवश्य चिन्तन करे और संकल्प लें कि हम अपने समाज के कार्यक्रम श्री महेश नवमी और आगामी कार्यक्रम में अवश्य उपस्थित रहे।
अल्केश झंवर, इंदौर।
संस्थापक प्रधान संपादक "आकांक्षा"
प्रबंध -संपादक निमाड़ प्रहरी- समाचार-पत्र





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