राजा रजवाड़ा के दौर में ऐतिहासिक नगरी बुरहानपुर को दखन के द्वारा के नाम से एक अलग पहचान मिली थी।

 ।।यह चर्चा चौपाल की नहीं  लेह लद्दाख की है।।

राजा रजवाड़ा के दौर में ऐतिहासिक नगरी बुरहानपुर को दखन के द्वारा के नाम से एक अलग पहचान मिली थी। 

फिर मुगलों का दौर आया तो बुरहानपुर को मुमताज की मृत्यु के कारण, दिल्ली दरवाजे के कारण, असीरगढ़ किले के कारण और खूनी भंडारे के कारण एवं काले ताजमहल के कारण, और मोहब्बत की नगरी के नाम से एक और नयी पहचान मिली।

त्रिलोक जैन  प्रबंध  संपादक

निमाड प्रहरी 9977766399

 वक्त बितता गया और और 2003 में जन्मे बुरहानपुर का इतिहास भी बदलता गया। आज के नए दौर में बुरहानपुर को, पावर लूम व्यवसाय के कारण मैक्रो विजन स्कूल के साथ-साथ टेक्समो पाइप, एवं केला उत्पादन के कारण एक अलग नई पहचान मिली। फिर समय ने करवट ली और मलकापुर से आए स्व. रतन लाल जी जैन के बेटे


आनंद जैन ने 1999 में ऐतिहासिक नगरी में नया इतिहास रचते हुए एक नई इबारत लिखी और बुरहानपुर जैसे छोटे शहर से देश को एक आईपीएस अधिकारी मिला जिसका नाम है आनंद जैन बड़े गर्व की बात है कि छोटे से शहर बुरहानपुर में 1972 में जन्मे आनंद जैन आज लेह लद्दाख में डीजीपी के पद पर बुरहानपुर का सम्मान बड़ा रहे, उनके अनुज जितेंद्र जैन ने जानकारी देते हो बताया कि उनके बड़े भाई आनंद जैन नेहरू माटेनरी स्कूल के। छात्र रहै! 
 और रायपुर से इंजीनियरिंग कर शासकीय सेवा में बुरहानपुर जिले का सम्मान बढ़ाने हेतु गये है।
डीजीपी आनंद जैन बुरहानपुर के सैकड़ो लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में एक अलग पहचान बना रहे हैं आनंद जैन केवल जैन समाज के ही गौरव नहीं है पूरे बुरहानपुर जिले को उन पर गर्व है,

बधाई हो ! आनंद सर आप देश की सेवा में लगकर लोगों को प्रेरणा देते रहे, आपसे प्रेरित होकर और लोग भी जिले का मान सम्मान बढ़ाते रहे।

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