पतंगबाज की यादें
पतंगबाज की यादें
निमाड़ प्रहरी 9977766399
राजकुमार जैन
पतंग का नाम सुनते ही ना जाने कितनी खट्टी मीठी यादें मन में दौड़ जाती है, 80 के दशक में अलग अलग प्रकार की पतंगों से बाजार पटे रहते थे, सिरकटी, तिरंगी, चौकड़ी, परियल, डंडियल, कानभात, आंखभात, चांदभात, गिलासिया, चुग्गी, ढग्गा, और भी ना जाने कितने अनूठे प्रकार की पतंगे होती थी ।
पतंग बनाना और उनको उडाना एक विशिष्ट कला होती थी । किसी गली में डोर 'सूती' जा रही है। कोई फ्यूज बल्बों को फोड़कर काँच पीस रहा है। कोई 'सरस' या नीला थोथा रंग के साथ घोल रहा है। घोल तैयार होते ही किसी के हाथों में धागे की 'रील' होती है। और कोई उसे घोल में डुबोकर 'चकरी' में लपेट रहा है। इस चकरी को 'हुचका' या 'उचका' भी कहते हैं। बिजली के दो खंबों के बीच यह डोर सुखाई जाती है और फिर लपेट ली जाती है। यह संक्रांति की पूर्व संध्या की बात होती थी, खैर अब तो डोर और पतंग बाजार से ले आते है।
उस्ताद लोग हम बच्चों को पतंग उड़ाने की कला स्टेप बॉय स्टेप सिखाते थे। सबसे पहले जोते बांधना सिखाया जाता था। यह एक युक्तिसंगत वैज्ञानिक प्रक्रिया है । सबसे पहले तो अपनी पतंग को मांझे से बांधे. इसके लिए मांझे का लगभग 1 मीटर लम्बाई का धागा तोड़ लें और उसे दोहरा कर लें. अब आप पतंग के बीच में धनुषाकार किमची और लम्बवत किमची के मिलने वाले जगह में एक छेद लेफ्ट साइड में ऊपर की तरफ करें और दूसरा चीड़ राइट साइड में नीचे की तरफ करें (ऊपर नीचे तिरछे छेद) और मांझे के एक सिरे को बांधे, इसी तरह आप पतंग के नीचे वाले हिस्से में छेद करें और मांझे को बांधे. अब आप मांझे को बीच में से पकड़ें और उसे दोनों तरफ समान लम्बाई में नापें और मांझे के ठीक बीच में ऊपरी हिस्से में एक लगभग 1 इंच का लूप रखते हुए गाँठ लगा दें.पतंग को लूप से पकड़कर जमीन से ऊपर उठा कर हवा में लहरा कर उसका बेलेंस देखलें यदि दोनों तरफ समान है पतंग के जोते तैयार हैं ।
यदि पतंग एक तरफ झुक रही है तो दुसरीं तरफ मोटे धागे या सुतली का टुकड़ा बांध कर उसको बेलेंस किया जाता था, इस कला को खिरनी बांधना कहते है ।
अब उस लूप में मांझे को कसकर गठान लगाकर बांधे और अपने हाथ में मांझे को पकड़ें और अपने साथी को बोलें कि वो पतंग को आपसे दूर ले जाकर जाए और पतंग को दोनों कोनो से पकड़कर हवा की दिशा (हवा का प्रवाह आपके पीछे से आपकी साथी के चेहरे की तरफ हो) में खड़ा हो, धागे को ताने और साथी को पतंग को हवा में ऊपर धकेलने / उछालने के लिए बोलें ताकि आपकी पतंग हवा में आ सके. इस बात को ध्यान में रखें कि पतंग को उड़ने के लिए पेड़ या अन्य कोई भी किसी भी तरह की रूकावट न हो. साथ ही आप हवा की दिशा में ही पतंग को उड़ायें ताकि आपकी पतंग को जरूरी हवा मिलती रहे. जैसे ही वो उडनची दे तुरन्त मांझे को दो चार हाथ खिंचे, पतंग उड़ाने लगेगी ।
पतंग को हवा में बनाये रखने के लिए अंगूठे और उंगली के मध्य पकड़े धागे को कोहनी के जोड़ के दम पर कलाई से धागे को जर्क दिया जाता है जिससे पतंग ऊपर चढ़ती है और इधर उधर भटकने से बचती है, ढील दें ठुनकी दें और अपनी पतंग को ऊपर उठते हुए देखते हुए, पतंग उड़ाने का आनन्द लें ।
पेंच दो तरह से लड़ाए जाते हैं डोर खींचकर या ढील देकर। डोर खींचकर पेच लड़ाना चाहते हैं तो आपकी पतंग विरोधी पतंग से नीचे होनी चाहिए। अगर ढील देकर पेंच लड़ाना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि डोर को धीरे-धीरे छोड़ें। इस दौरान पतंग को गोल-गोल घुमाते रहेंगे तो जीतने की संभावना ज्यादा रहेगी। पेंच लड़ाते समय ठुनकी देते हुए मांझा टकराएं। जैसे ही आपको लगे की आपकी ठुनकी से आपके पतंग ने जोर पकड़ा है रप्प से ढील दें और विरोधी के मांझे पर रिग्गे पटक कर काट दें और गर्व से चिल्लाये
*का .... ट .....टा .....है...!*
- राजकुमार जैन

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