यथार्थ की दृष्टि से ये है खण्डवा के गौरव-: लेखक -निमाड़ के जाने माने -संपादक श्री संजय राठी जी का आलेख
खण्डवा के क्रांतिकारी
यथार्थ की दृष्टि से ये है खण्डवा के गौरव-: लेखक -निमाड़ के जाने माने -संपादक श्री संजय राठी जी का आलेख
संजय राठी संपादक-- निमाड़ प्रहरी
E-mail nimadprahari2012@gmail .com
खंडवा यथार्थ की दृष्टि से ये है खण्डवा के गौरव-: माखन दादा के अलावा इनमें से प्रभागचन्द्र शर्मा, धन्नालाल शाह और बाबूलाल सोनी भी पत्रकार थे। बाबूलाल सोनी का अख़बार विंध्याचल भी कर्मवीर गली से ही निकलता था। विंध्याचल वर्ष 1986 तक छपता रहा, इस अख़बार को हम सब ने बचपन में देखा है। कर्मवीर गली का पहला घर माखनलाल चतुर्वेदी का था और वहाँ जालीदार कमरे से कर्मवीर समाचार-पत्र 1960 तक छपता रहा। तत्कालीन प्रेस-परिसर रही होगी वो सँकरी गली। बाबूलालजी सोनी का परिवार विंध्याचल प्रेस के नाम से आज भी छपाई का व्यवसाय कर रहा है।
तब पंधाना और पुनासा तहसील नही बनी थी यह खण्डवा तहसील थी
ये आज के "वो वाले" गौरव नही है जिनको पच्चीस हज़ार में नगर का गौरव, पचास हज़ार में ज़िले का गौरव और एक लाख में निमाड़ का गौरव बनाकर फ़ोटो छाप दी जाए।
ये लोग स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं। लाठी खाई और जेल भी गए थे।
"सशुल्क" जिन्हें आजकल गौरव बनाकर पेश किया जा रहा है उनके पड़ोसी और रिश्तेदार उनको "कैसी" निगाह से देखते हैं इसका उत्तर बहुत रोचक रहता है।


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