श्रीराम कथा में भोलेनाथ के मूलस्थान कैलाश मानसरोवर मुक्ति हेतु संकल्प
श्रीराम कथा में भोलेनाथ के मूलस्थान कैलाश मानसरोवर मुक्ति हेतु संकल्प
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बुरहानपुर। लालबाग स्थित श्रीराम मंदिर, चिंचाला में चल रही श्रीराम कथा के दौरान कथा वाचक प.पू. साध्वी ममता व्यास जी ने भगवान श्रीराम के नामकरण संस्कार का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि त्रेतायुग में प्रभु
श्रीराम ने माता कौशल्या की कोख से जन्म लिया, वहीं माता कैकेयी से भरत तथा माता सुमित्रा से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। चारों भाई बाल्यकाल से ही एक-दूसरे के साथ छाया की तरह रहते थे।
नामकरण संस्कार की महत्ता बताते हुए प.पू.ममता दीदी ने कहा कि सनातन वैदिक परंपरा में नामकरण संस्कार अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। प्राचीन परंपरा में बालक का नाम उसकी प्रकृति, ग्रह-नक्षत्र एवं गणितीय गणना सहित विभिन्न आधारों पर रखा जाता था, जिससे उसके जीवन को दिशा और संस्कार प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हम अपनी सुविधानुसार नाम रखने लगे हैं और इसी कारण नाम और कर्म में विरोधाभास दिखाई देता है। हमें सनातन संस्कृति के 16 संस्कारों को समझकर उन्हें जीवन में अपनाने की आवश्यकता है।
श्रीराम कथा के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं आस्था का वातावरण देखने को मिला। इसी अवसर पर भारत तिब्बत समन्वय संघ द्वारा श्रावण मास में कैलाश मानसरोवर मुक्ति अभियान के अंतर्गत महा संकल्प वाचन के लिए प.पू. साध्वी ममता व्यास जी से आग्रह किया गया।
साध्वी जी के मार्गदर्शन में उपस्थित श्रद्धालुओं ने कैलाश मानसरोवर की मुक्ति एवं इस विषय में जनजागरण के लिए सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर आयोजक श्रीमती अनिता अमर यादव, संतोष पवार, रूपचंद वाधवानी, गणेश दुनगे, संपत बाई वर्मा, लालचंद साहू एवं नीता वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भारत तिब्बत समन्वय संघ के ओम प्रकाश शर्मा, बलराज नावानी, आशीष शुक्ला, जिला अध्यक्ष मुकेश पूर्व, किशोर राठौर सहित उपस्थित पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने प.पू. साध्वी ममता व्यास जी का नमन एवं अभिनंदन किया।
इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने कैलाश मानसरोवर के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए जनजागरण अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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