आह्वान’ संस्था द्वारा मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर ऑनलाइन परिचर्चा का सफल आयोजन

 

​‘आह्वान’ संस्था द्वारा मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर ऑनलाइन परिचर्चा का सफल आयोजन

निमाड़ प्रहरी 9977766399

बुरहानपुर  31 अगस्त:साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘आह्वान’ के तत्वावधान में महान उपन्यासकार एवं कहानीकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती (31 अगस्त) के अवसर पर एक विशेष ऑनलाइन परिचर्चा का सफल आयोजन किया गया।


इस परिचर्चा में क्षेत्र एवं साहित्य जगत की प्रबुद्ध हस्तियों ने प्रेमचंद के साहित्य, उनकी सामाजिक चेतना और आज के दौर में उनके विचारों की प्रासंगिकता पर गहन मंथन किया।

​कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख वक्ताओं ने प्रेमचंद जी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किए:

श्री शोभालाल शर्मा जी ने कहा : "मुंशी प्रेमचंद केवल शब्दों के जादूगर नहीं थे, बल्कि उन्होंने अपने साहित्य के जरिए समाज के शोषित और वंचित वर्ग के दर्द को एक जीवंत रंग दिया है। जिस प्रकार एक चित्रकार कैनवास पर जीवन की सच्चाई उकेरता है, ठीक उसी तरह प्रेमचंद ने अपने उपन्यासों में भारतीय समाज के यथार्थ को उकेरा है।"

संजय चित्ते ने अपने कथन में बताया कि  "प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी उतनी ही जीवंत हैं जितनी उनके दौर में थीं। उनकी रचनाओं में आम आदमी का संघर्ष, उसकी उम्मीदें और उसकी मानवीय संवेदनाएँ गहराई से झलकती हैं। साहित्य में उनकी यह देन अमूल्य है।"

फौफनार के नितिन वाडले ने कहा  "प्रेमचंद ने साहित्य को 'अभिजात वर्ग' के कमरों से निकालकर खेत-खलिहानों और आम रास्तों पर खड़ा किया। उन्होंने कथा साहित्य को समाज सुधार का एक सशक्त माध्यम बनाया, जो आज भी नए लेखकों को दिशा दिखाता है।"

राहुल चौधरी ने कहा  "किसान, मजदूर और ग्रामीण भारत की आत्मा अगर किसी के साहित्य में सबसे मुखर होकर बोलती है, तो वे मुंशी प्रेमचंद हैं। ‘गोदान’ और ‘कफ़न’ जैसी रचनाएँ आज भी समाज की विषमताओं पर सीधा प्रहार करती हैं।"

श्यामसिंह ठाकुर श्याम : "प्रेमचंद के विचार कालजयी हैं। आज के इस डिजिटल युग में भी जब हम सामाजिक न्याय और नैतिक मूल्यों की बात करते हैं, तो प्रेमचंद का साहित्य हमारा मार्गदर्शन करता है। हमें उनकी कृतियों को युवा पीढ़ी तक और अधिक सक्रियता से पहुँचाने की आवश्यकता है।" इस परिचर्चा में सुजीत गहलोद एवं कपिल शर्मा भी कुछ देर के लिए जुड़े।

​परिचर्चा के अंत में संस्था 'आह्वान' के प्रतिनिधियों ने सभी सहभागी वक्ताओं एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े और विचारों के इस आदान-प्रदान की सराहना की।

​- प्रेषक:

(आह्वान संस्था / 

संपर्क: [ 7828025141

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