जब आप नियंत्रित नहीं किए जा सकते, तो आपसे नफ़रत की जाएगी—और यही आपकी शक्ति है।
जब आप नियंत्रित नहीं किए जा सकते, तो आपसे नफ़रत की जाएगी—और यही आपकी शक्ति है।
-निमाड़ प्रहरी 9977766399
सरल, सहज और मृदु हृदय के व्यक्ति को देखकर संसार
एक भूल करता है—वह उसकी सरलता को उसकी कमजोरी समझ लेता है। जो व्यक्ति प्रेम से मिलता है, सबके सुख-दुःख में सहभागी होता है, आवश्यकता पड़ने पर सहायता करता है और बिना किसी प्रतिफल की अपेक्षा के सहयोग या सेवा करता है, उसे स्वार्थी लोग अपने लिए सहज अवसर मान लेते हैं।
उन्हें लगता है—इसे थोड़े लाभ का प्रलोभन देकर, प्रशंसा के कुछ शब्द बोलकर, भावनाओं को छूकर या किसी स्वार्थ का आश्वासन देकर अपने अनुकूल किया जा सकता है।
परंतु सरल मनुष्य भोला नहीं होता। उसकी सरलता के भीतर विवेक जाग्रत होता है।
वह अच्छा इसलिए नहीं करता कि बदले में उसे कुछ मिले। सहायता उसके लिए सौदा नहीं, स्वभाव है। सेवा उसके लिए प्रदर्शन नहीं, भीतर का आनंद है। सहयोग उसके लिए किसी लाभ की सीढ़ी नहीं, सहज मानवीय भाव है। जिस हृदय में पाने का लोभ नहीं होता, उसे प्रलोभन के द्वारा चलाया नहीं जा सकता।
यही कारण है कि उसके ऊपर शासन बाहर का नहीं, भीतर का होता है। उसका मन उसके वश में है, उसकी बुद्धि उसके विवेक के अधीन है, उसकी भावनाएँ उसके संयम में हैं और उसकी इंद्रियाँ उसकी चेतना द्वारा संचालित हैं। वह इच्छा का दास नहीं, इच्छा का स्वामी होता है।
इसलिए कोई उसे धन का लालच देकर ऐसा कार्य नहीं करा सकता जो उसके सिद्धांतों के विरुद्ध हो। कोई प्रशंसा उसके विवेक को खरीद नहीं सकती। कोई भावनात्मक दबाव उसे नीति से विचलित नहीं कर सकता।
एक ईमानदार अधिकारी के सामने रिश्वत रखकर देखिए—यदि उसके भीतर लोभ पर विजय का सामर्थ्य है, तो धन उसके निर्णय का स्वामी नहीं बन सकता। वह जानता है कि कुछ लाभ पाना अपनी आत्मा का मूल्य चुकाने से कहीं महँगा है।
और यही वह बिंदु है जहाँ सरल मनुष्य की वास्तविक शक्ति प्रकट होती है।
स्वार्थी और लोभी लोग उससे घृणा कर सकते हैं, क्योंकि उनकी चाल उसके विवेक पर प्रभाव नहीं डालती। वे उसे अपने लाभ के लिए मोड़ नहीं सकते, खरीद नहीं सकते, बहका नहीं सकते।
वे उससे घृणा कर सकते हैं, लेकिन उसे नियंत्रित नहीं कर सकते।
क्योंकि जिस मनुष्य को लोभ नहीं खरीद सकता, प्रशंसा नहीं बहका सकती और स्वार्थ नहीं झुका सकता—उसकी स्वतंत्रता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।
सरल रहिए। निष्कपट रहिए।
लेकिन अपने भीतर इतना आत्मसंयम रखिए कि आपकी अच्छाई किसी के स्वार्थ का साधन न बन सके।
@अश्विनी कुमार नयन
✍🏻 निमाड़ प्रहरी 9977766399

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