बाबुजी स्व.गुलाबचंद जी पूर्वे निष्पक्ष पत्रकारीता के प्रति समर्पित लोह पुरूष थे।

 स्मृति विशेष :-

बाबुजी स्व.गुलाबचंद जी पूर्वे निष्पक्ष पत्रकारीता के प्रति समर्पित लोह पुरूष थे।  

बुरहानपुर। पित पत्रकारिता और धनार्जन की लालसा में जब समाचार पत्रों के कुछ संवादाताओं का मकसद ही परिवर्तीत हो गया हो तब ऐसे पत्रकारों का स्मरण होना स्वभावीक है , जिनके लिए पत्रकारिता एक धर्म,कर्तव्य परायणता, समाजसेवा और राष्ट्र सेवा का पवित्र कार्य हुआ करता था। ऐसे ही पत्रकार इस चौथे स्तंभ की नीव कहे जा सकते थे। जिन्होंने अपनी तटस्थता, निष्पक्षता और निर्भिक्ता से इस चौथे स्तंभ को एक मजबुत आधार दिया। इस ऐतीहासिक शहर में स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर 9 वें दशक तक ऐसे ही पत्रकारों का बोलबाला रहा जिन्होंने एक टीम की तरह कार्य किया। तथ्यों का पत्रकारिता धर्म से कोई समझोता नहीं किया। यद्दपी वर्तमान में समाचार संप्रेशण एवं लेखन के अनैक साधन विकसीत हो चुके है और पत्रकारों को कठौर परिश्रम नहीं करना पड़ता है, किन्तु इस काल के पत्रकार घटना स्थल पर स्वयं उपस्थित होकर अपने स्वविवेक से तत्थ्यों की खोज किया करते थे।

बाबुजी स्व.गुलाबचंदजी पूर्वे ने समस्याओं को उजागर किया और उन्हें निराकरण तक पहुंचाया । स्व.लक्ष्मीदास जी मास्टर, स्व.मोहनचंद जी यादव, स्व.गुलाबचंद जी जलगांव वाले,स्व.अजहर भाई, स्व.विनोद दलाल, स्व.चंदनसिंह बेस, घनश्याम मालवीय, मालती प्रजापति, स्व.सुगनचंद पंचारिया शर्मा, स्व.नारायणदास नावानी, स्व.हिरालालजी शर्मा, बृजलालजी यादव,स्व. किर्ती कुमार जैन, ऐसे समकालीन पत्रकारों की टीम के सक्रिय सदस्य थे । जिन्होंने जिवनपर्यंत ना केवल पत्रकारिता धर्म निभाया ,बल्कि पत्रकारों के लिए संर्घष भी किया। उन्हें जगाया और प्रेस क्लब को भी जागृत किया। उन दिनों राष्ट्रीय ख्याती प्राप्त संस्था नवरात्री व्याख्यान माला में देश के विभिन्न वर्गों के वक्ताओं का आगमन हुआ करता था तथा उनके व्याख्यानों को संकलन प्राथमिकता के आधारों पर अपने अपने दैनिक समाचारों में प्रेक्षण करना पत्रकारों की प्राथमिकता बन चुकी थी ,तब स्व.गुलाबचंन्द पूर्वे जी स्वदेश,नवभारत,पांचजन्य, चरैवैती,राजस्थान पत्रिका और ऑबर्जवर जैसे राष्ट्रीय और प्रादेशीक समाचार पत्रों के जिला स्तरीय प्रतिनिधि के रूप में समाचार संप्रेक्षण के लिए स्वयं को एक कदम आगे समझकर लम्बी रेस लगाने के अवसरों को नहीं चुकते थे।

उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी कि वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचार धारा से जुड़े थे , किन्तु जहां तक समाचार संकलन और संप्रेक्षण का राष्ट्रीय एवं समाजिक दायित्व था उन्होंने उनकी निजता की अपेक्षा निष्पक्षता का अधिक ध्यान रखा। धर्मनिर्पेक्ष समाजवाद और राष्ट्रीय विचार धारा के राजनेताओं से उनकी समिपता और उनके समाचारों की संप्रेक्षण की प्राथमिकता उनके कर्तव्य में कभी बाधा नहीं बनी। वे अक्सर कहा करते थे मेरी अपनी विचारधारा अलग हो सकती है। किन्तु मेरा पत्रकारिता धर्म बहुजनहिताएं है। वे अपने कम उम्र पत्रकारिता से जुड़े स्व.विजय बहादुरसिंह, आशिष शर्मा, उदयसिंह वर्मा,दिनेश जैन, स्व.एहकाम अंसारी, लियाकत खान,स्व.सुरेश तुलसवानी,स्व.विजय शिंदे, स्व.बलवीरसिंह अरोरा, स्व.सुहास पाटीदार,अजय उदासीन सहित अन्य साथियों के सच्चेहितचिंतक रहे। उनके मित्र रहे तथा उन्हें सीख देने से कभी नहीं चुकते थे। उनके साथियों को असीम स्नेह करने वाले स्व.पूर्वेजी के किला रोड़ स्थित आवास पर पत्रकारों का जमावड़ा सदा लगा रहता था। अपने कार्यों के अतिरिक्त वे कभी किसी की आलोचना और निंदा तथा अमेत्री को अपने जीवन में कोई स्थान नहीं देते थे। इसलिए सभी उनके लिए थे और वे अजातशत्रु थे। यहीं कारण था कि बुरहानपुर प्रेस क्लब ने सर्वसम्मति से उन्हें अध्यक्ष चुना वे संघ की चिंता करते थे और सब उनका सम्मान करते थे। आज वे इस दुनिया में नहीं है उनका बेटा मुकेश कुमार पुर्वे उनके कार्यकाल में पत्रकारिता धर्म का प्रशिक्षण प्राप्त करता रहा और उनके मरणोप्रांत नवभारत समाचार पत्र का जिला प्रतिनिधि बना और बुरहानपुर प्रेस क्लब ने उन्हें अध्यक्ष भी सर्वसम्मति से निर्वाचित था। आज वह रेडक्रास के संचालक सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के जिला मिडिया प्रभारी एवं अनुज राकेश कुमार पुर्वे एक दैनिक इंदौर समाचार पत्र के दायित्व को निष्ठा पूर्वक निभा रहे है।

पत्रकारिता कि नीव के पत्थर के रूप में स्व.गुलाबचंदजी पूर्वे की उपस्थिती पत्रकार जगत में शारीरिक रूप से उपलब्ध नहीं है , किन्तु उनकी प्रेरणा और संबल आज भी पत्रकारों को प्रेरित करने के लिए मील का पत्थर है। आज पुण्य स्मरण होता है तब पुरी श्रद्धा और सम्मान से उन्हें याद किया जाता है। नि:संदेह स्व. गुलाबचंद जी पूर्वे जी एक चिरस्मरणीय व्यक्तित्व का नाम है। अनेक पुरस्कारों एवं पदवीयों से सम्मानित स्व.पूर्वे को मरणोप्रांत ताप्ती उत्सव समिति द्वारा ताप्ती रत्न सम्मान से भी विभुषित किया गया।

                                                    

       साहित्यकार एवं वरिष्ठ पत्रकार घनश्याम मालवीय

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